अलवर जिले में पहली बार ‘खड़ा योग’ की अनूठी तपस्या, 41 दिन तक निरंतर खड़े रहकर तपस्या का संकल्प।
By Shubh Bhaskar ·
15 Feb 2026 ·
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अलवर जिले में पहली बार ‘खड़ा योग’ की अनूठी तपस्या, 41 दिन तक निरंतर खड़े रहकर तपस्या का संकल्प।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- माचाड़ी-प्राचीन काल में अलवर जिले की राजधानी रहे माचाड़ी कस्बे के राजगढ़-माचाडी मार्ग पर नाई का मंदिर इन दिनों आस्था और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है। तपोवन उत्तर कांशी से पधारे तपस्वी साधु जय सिंह महाराज यहां एक अनोखी और कठोर साधना ‘खड़ा योग’ कर रहे हैं। माचाड़ी क्षेत्र की इस पावन धरा पर पहली बार किसी संत द्वारा इस प्रकार की कठिन तपस्या किए जाने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
महाराज ने 41 दिनों तक लगातार 24 घंटे खड़े रहने का संकल्प लिया है। आज उनकी साधना का पांचवां दिन है। बिना विश्राम और बिना शयन के दिन-रात खड़े रहकर वे ईश्वर आराधना में लीन हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अलवर क्षेत्र में इस तरह की कठोर तपस्या उन्होंने पहले कभी नहीं देखी।
भक्ति की अग्निपरीक्षा: न विश्राम, न निद्रा
इस तपस्या के दौरान महाराज न तो बैठते हैं और न ही लेटते हैं। दिन-रात एक ही अवस्था में खड़े रहकर वे जप और ध्यान में तल्लीन रहते हैं। पांचवें दिन जब संवाददाता सौरभ शर्मा व श्रमजीव पत्रकार संघ के तहसील उपाध्यक्ष नागपाल शर्मा माचाड़ी ने उनसे चर्चा की तो उनके चेहरे पर थकान के बजाय अद्भुत तेज और आत्मविश्वास झलकता दिखाई दिया।
अपनी साधना के उद्देश्य पर उन्होंने कहा,
“यह शरीर नश्वर है, लेकिन संकल्प अमर है। यह तपस्या केवल आत्म-शांति के लिए नहीं, बल्कि विश्व कल्याण और धर्म जागरण तथा गौमाता को राष्ट्र माता घोषित करवाने के लिए है। ईश्वर की कृपा से पांच दिन पूर्ण हुए हैं, शेष दिन भी भक्ति और विश्वास के साथ पूरे होंगे।” महाराज ने यह भी बताया कि यह तपस्या 41 दिनों से ज्यादा भी हो सकती है।
श्रद्धा और कौतूहल का केंद्र बना मंदिर
महाराज की इस अडिग साधना ने क्षेत्र में श्रद्धा का वातावरण बना दिया है। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। स्थानीय स्वयंसेवक व गौसेवक व्यवस्था को संभाल रहे हैं ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
माचाड़ी स्थित नाई का मंदिर इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया है, जहां आस्था और संकल्प की अद्भुत मिसाल देखने को मिल रही है।