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शराब के खिलाफ गांव की नारी शक्ति का विस्फोट देसी–अंग्रेजी शराब दुकान पर महिलाओं का धावा, तोड़फोड़ से मचा हड़कंप

By Shubh Bhaskar · 03 Feb 2026 · 53 views
शराब के खिलाफ गांव की नारी शक्ति का विस्फोट
देसी–अंग्रेजी शराब दुकान पर महिलाओं का धावा, तोड़फोड़ से मचा हड़कंप
पूर्व में शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से फूटा गुस्सा, पुलिस ने संभाला मोर्चा
दैनिक शुभ भास्कर उत्तर प्रदेश बुंदेलखंड सूरज सिंह ललितपुर जनपद के महरौनी कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत खितबांस गांव में शुक्रवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, जब ग्रामीण महिलाओं का गुस्सा देसी एवं अंग्रेजी शराब की दुकान पर फूट पड़ा। महिलाओं ने दुकान में घुसकर जमकर हंगामा किया और शराब की पेटियों को बाहर निकालकर सड़क पर फेंक दिया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्र होकर शराब दुकान पर पहुंचीं और दुकान संचालन के विरोध में नारेबाजी करते हुए तोड़फोड़ शुरू कर दी। कुछ ही देर में सड़क पर बिखरी शराब की पेटियों को देखकर पूरे गांव में हड़कंप की स्थिति बन गई।
“शराब ने बिगाड़ दिया गांव का माहौल”
आक्रोशित महिलाओं का कहना है कि शराब की दुकान खुलने के बाद से गांव का सामाजिक वातावरण पूरी तरह से खराब हो गया है। आए दिन शराबियों द्वारा झगड़े, गाली-गलौज और महिलाओं के प्रति अभद्र व्यवहार की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे ग्रामीणों का जीना दूभर हो गया था।
महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने पूर्व में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर दुकान हटवाने की मांग की थी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से उनका आक्रोश लगातार बढ़ता गया और अंततः यह उग्र प्रदर्शन के रूप में सामने आया।
सूचना पर पहुंचा पुलिस बल, स्थिति पर पाया काबू
घटना की जानकारी मिलते ही महरौनी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और महिलाओं को समझा-बुझाकर स्थिति को शांत कराया। पुलिस ने दुकान क्षेत्र को घेरकर कानून-व्यवस्था बहाल की और मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और संबंधित पक्षों से बातचीत कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उच्चाधिकारियों को भी घटना से अवगत कराया गया है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर शराब दुकानों के स्थान चयन और ग्रामीण क्षेत्रों में उनके सामाजिक प्रभाव को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई होती, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।

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