परशुराम सेना राजस्थान ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, UGC के नए प्रावधान 2026 को तत्काल वापस लेने की करी मांग।
By Shubh Bhaskar ·
28 Jan 2026 ·
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परशुराम सेना राजस्थान ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, UGC के नए प्रावधान 2026 को तत्काल वापस लेने की करी मांग।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- जयपुर-
परशुराम सेना राजस्थान ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जनवरी 2026 में जारी किए गए UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग करते हुए महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन भेजा है।
परशुराम सेना राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मीत गौतम ने जानकारी देते हुए बताया कि यह अधिसूचना दिनांक 13 जनवरी 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित कर तत्काल प्रभाव से लागू की गई है, जो उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से लाई गई बताई जा रही है। इस अधिसूचना में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं दिव्यांग छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है तथा सभी विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों में 90 दिनों के भीतर इक्विटी कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया है, जिन्हें शिकायतों की जांच के व्यापक अधिकार दिए गए हैं।
मीत गौतम ने कहा कि परशुराम सेना राजस्थान का स्पष्ट मत है कि यह अधिसूचना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 एवं 21 में निहित समानता के मूल अधिकारों की भावना के अनुरूप नहीं है। यह प्रावधान समानता की समग्र अवधारणा स्थापित करने के बजाय केवल कुछ वर्गों के अधिकारों पर केंद्रित प्रतीत होता है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के संवैधानिक अधिकारों की पूर्णतः उपेक्षा की गई है।
उन्होंने कहा कि यह अधिसूचना समान अवसर (Equal Opportunity) के सिद्धांत को कमजोर करती है, जो संविधान की मूल संरचना का अभिन्न अंग है। किसी भी नीति का उद्देश्य सभी वर्गों के लिए संतुलित न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि किसी एक वर्ग के पक्ष में असंतुलन उत्पन्न करना।
प्रदेशाध्यक्ष ने यह भी बताया कि प्रारंभिक ड्राफ्ट में OBC वर्ग को शामिल न किए जाने और झूठी अथवा दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर किसी प्रकार के दंडात्मक प्रावधान के अभाव को लेकर व्यापक विवाद रहा है। यद्यपि अंतिम संस्करण में OBC वर्ग को शामिल किया गया, लेकिन फर्जी शिकायतों पर दंड का स्पष्ट प्रावधान न होना इस अधिसूचना के दुरुपयोग की आशंका को बढ़ाता है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में यह अधिसूचना विश्वविद्यालयों पर लागू की जा चुकी है, जिससे शैक्षणिक परिसरों में भय, असंतोष और वैचारिक असंतुलन का वातावरण बन रहा है, जो शिक्षा के स्वस्थ एवं निष्पक्ष वातावरण के प्रतिकूल है।
मीत गौतम ने यह भी उल्लेख किया कि देश की अनुमानित जनसंख्या लगभग 140 करोड़ है, जिसमें से लगभग एक-तिहाई सामान्य वर्ग से संबंधित है। इस प्रकार की अधिसूचनाएं सामान्य वर्ग के करोड़ों छात्रों के संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करती हैं, जो सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के लिए घातक हो सकती हैं।
परशुराम सेना राजस्थान की प्रदेश कार्यकारिणी ने भारत सरकार से मांग की है कि उक्त UGC अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए तथा सभी वर्गों के छात्रों के अधिकारों को समान रूप से ध्यान में रखते हुए एक निष्पक्ष, संतुलित एवं संविधानसम्मत नीति का निर्माण किया जाए।
साथ ही संगठन ने चेतावनी दी कि जब तक यह अधिसूचना वापस नहीं ली जाती, तब तक परशुराम सेना राजस्थान सामान्य वर्ग के अन्य संगठनों के साथ लोकतांत्रिक, संवैधानिक एवं विधिक तरीकों से इसका विरोध जारी रखेगी तथा आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का सहारा भी लिया जाएगा।