ShubhBhaskar
SHUBHBHASKAR
E Paper

मजदूर आंदोलनों के दबाव में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की तैयारी: *एटक*

By Shubh Bhaskar · 18 Apr 2026 · 12 views
मजदूर आंदोलनों के दबाव में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की तैयारी: *एटक*

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):-अलवर- अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) ने एक विज्ञप्ति जारी कर बताया कि देशभर में मजदूरों द्वारा वेतन वृद्धि को लेकर चल रहे आंदोलनों के चलते केंद्र सरकार अब न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने पर विचार कर रही है। एटक के अनुसार, हाल ही में प्रकाशित समाचारों में संकेत मिले हैं कि वर्तमान ₹176 प्रतिदिन की दर को बढ़ाकर ₹350 से ₹450 प्रतिदिन तक किया जा सकता है, जिससे मासिक न्यूनतम वेतन लगभग ₹11,700 तक पहुंच सकता है।
विज्ञप्ति में बताया गया कि श्रम मंत्रालय नए सैलरी स्ट्रक्चर पर काम कर रहा है, जिसमें अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल सभी श्रेणी के श्रमिक शामिल होंगे। यदि यह नया फ्लोर वेज लागू होता है, तो सभी राज्यों को उसी के अनुरूप अपनी मजदूरी दरें तय करनी होंगी। न्यूनतम वेतन का निर्धारण 26 कार्य दिवसों के आधार पर किया जाएगा।
एटक ने यह भी कहा कि हरियाणा सरकार पहले ही अकुशल मजदूरों का मासिक वेतन ₹15,200 कर चुकी है, जबकि केंद्र सरकार का प्रस्तावित वेतन इससे काफी कम है, जो एक परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
संगठन ने जमीनी हकीकत का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान में निर्माण कार्यों में लगे मजदूर ०8 घंटे के ₹600 से ₹700 तक और खेतिहर मजदूर ₹500 से ₹600 तक कमा रहे हैं, जो बढ़ती महंगाई के मुकाबले अब भी अपर्याप्त है। ऐसे में फैक्ट्री मजदूरों के लिए प्रस्तावित न्यूनतम वेतन को भी एटक ने कम बताया है।
विज्ञप्ति में कहा गया कि चार श्रम संहिताओं के लागू होने और कारखाना अधिनियम 1948 में संशोधन के बाद भी मजदूर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। उनकी प्रमुख मांगों में उचित वेतन, साप्ताहिक अवकाश, ०8 घंटे से अधिक कार्य पर दोगुना भुगतान, कार्यस्थल पर सुरक्षा और बेहतर कैन्टीन सुविधाएं शामिल हैं।
एटक ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर मजदूर आंदोलनों को दबाने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और गिरफ्तारियां भी की गईं, लेकिन इसके बावजूद मजदूर अपने हकों के लिए डटे हुए हैं। यह आंदोलन नोएडा, मानेसर, पानीपत से होते हुए राजस्थान के भिवाड़ी और नीमराणा तक पहुंच चुका है।
संगठन के अनुसार, ये आंदोलन किसी योजना के तहत नहीं बल्कि वर्षों से हो रहे शोषण का परिणाम हैं। मजदूर अब समझ चुके हैं कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष ही एकमात्र रास्ता है। इन आंदोलनों के कारण ही हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में मजदूरी बढ़ाई गई है और अब केंद्र सरकार भी इस दिशा में कदम बढ़ाने को बाध्य हुई है।
एटक ने कहा कि इन आंदोलनों ने न केवल मजदूरों का वेतन बढ़ाने में भूमिका निभाई है, बल्कि समाज, प्रशासन और उद्योग जगत में उनकी उपस्थिति भी मजबूती से दर्ज कराई है। संगठन ने मजदूरों के संघर्ष को समर्थन देते हुए सरकार से उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की है।

More News

Share News

WhatsApp

X

Facebook

Telegram

Instagram

YouTube