इंसान के तीन बहीखाते: कर्मों का सच्चा हिसाब।
By Shubh Bhaskar ·
18 Apr 2026 ·
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इंसान के तीन बहीखाते: कर्मों का सच्चा हिसाब।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- माचाड़ी- समाज में अक्सर हम लेन-देन के हिसाब को बहीखाते से जोड़कर देखते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इंसान के जीवन में भी तीन तरह के बहीखाते होते हैं? ये बहीखाते न केवल हमारे आर्थिक व्यवहार, बल्कि हमारे कर्मों और चरित्र का भी पूरा हिसाब रखते हैं।
(१)सबसे पहला बहीखाता वह होता है, जो दुकानों या व्यापार में रखा जाता है। आज के समय में यह काम कंप्यूटर और डिजिटल माध्यम से भी होने लगा है। इसमें साफ-साफ दर्ज होता है कि किससे कितना लेना है और किसको कितना देना है। यह बहीखाता पूरी तरह व्यवहारिक और दिखाई देने वाला होता है।
(२)दूसरा बहीखाता सामाजिक होता है, जो लोगों के दिल और दिमाग में दर्ज रहता है। यदि आपने किसी के साथ अच्छा किया है, तो कई लोग उसे याद रखते हैं और समय आने पर आपके उस उपकार का बदला अच्छाई के रूप में लौटाते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो आपकी हजारों अच्छाइयों को भूलकर केवल एक गलती को याद रखते हैं। आज के दौर में यह सामाजिक बहीखाता कुछ इसी तरह काम करता है, जहां अच्छाइयों की रसीद नहीं बनती, लेकिन एक छोटी सी भूल का पूरा हिसाब रखा जाता है।
(३)तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण बहीखाता उस परम शक्ति के पास होता है, जिसे कोई ईश्वर, कोई अल्लाह, कोई वाहेगुरु या कोई जीजस के नाम से जानता है। यही असली और निष्पक्ष बहीखाता है, जहां इंसान के हर अच्छे और बुरे कर्म का सटीक लेखा-जोखा दर्ज होता है। यहां गलती चाहे अनजाने में ही क्यों न हुई हो, उसका हिसाब दर्ज हो जाता है, और यदि वही गलती बार-बार दोहराई जाए तो उसका प्रभाव और गहरा हो जाता है।
यह भी माना जाता है कि हम समाज में खुद को कितना भी दानवीर या सज्जन दिखा लें, लेकिन उस दान का स्रोत क्या है, उसका हिसाब भी इसी अंतिम बहीखाते में दर्ज होता है।
अंततः, इंसान को अपने कर्मों के प्रति सजग रहना चाहिए, क्योंकि सबसे सटीक और न्यायपूर्ण हिसाब उसी तीसरे बहीखाते में होता है, जहां कोई भी बात छिपी नहीं रहती।