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भीलवाड़ा बना शिवमय, कथा स्थल पर उमड़ा अपार श्रद्धालु सागर पं. पंडित प्रदीप मिश्रा का आह्वान—बेटियों को मजबूत बनाओ, खुद की रक्षा के योग्य बनाओ

By Shubh Bhaskar · 09 Apr 2026 · 20 views
भीलवाड़ा बना शिवमय, कथा स्थल पर उमड़ा अपार श्रद्धालु सागर
पं. पंडित प्रदीप मिश्रा का आह्वान—बेटियों को मजबूत बनाओ, खुद की रक्षा के योग्य बनाओ

शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।

भीलवाड़ा-मेवाड़ की पावन धरा भीलवाड़ा इन दिनों भक्ति और आध्यात्म के रंग में पूरी तरह रंगी हुई है। शहर के मेडिसिटी ग्राउंड में पहली बार आयोजित श्री शिव महापुराण कथा ने मानो आस्था का महासंगम खड़ा कर दिया है। कथा के पहले ही दिन लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इसे ऐतिहासिक बना दिया। करीब 11 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में फैले आयोजन स्थल पर बनाए गए विशाल डोम और पांडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भर गए, वहीं बाहर तक जनसैलाब नजर आया।
कथा के सूत्रधार पंडित प्रदीप मिश्रा जैसे ही संकटमोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबूगिरी महाराज के साथ मंच पर पहुंचे, पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’ के जयघोष से गूंज उठा। व्यास पीठ पर विराजित होने से पूर्व उन्होंने भीलवाड़ा की पावन भूमि को नमन किया और यहां के श्रद्धालुओं की आस्था को अद्वितीय बताया।
कथा के प्रथम दिन गुरु वंदना के साथ शुरुआत करते हुए पंडित मिश्रा ने शिव भक्ति का महत्व विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की भक्ति सरल और सहज है—सच्चे मन से अर्पित एक लोटा जल भी जीवन की कठिनाइयों को दूर कर सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को शिव के प्रति अटूट विश्वास रखने और अपने भीतर झांककर ईश्वर को अनुभव करने का संदेश दिया।
बेटियों को बनाओ सामर्थ्यवान:पं. मिश्रा
कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने समाज को झकझोरने वाला संदेश देते हुए कहा कि वर्तमान समय में बेटियों को केवल संस्कार और शिक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें आत्मरक्षा के लिए भी सक्षम बनाना जरूरी है। “बेटियों को पढ़ाओ, उन्हें मजबूत बनाओ, जरूरत पड़े तो डंडा, तलवार और हथियार चलाना भी सिखाओ, ताकि वे अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकें,” उन्होंने कहा।
उन्होंने “बहू पढ़ाओ—देश बचाओ” का नारा देते हुए कहा कि यदि परिवार की बहुएं शिक्षित होंगी तो आने वाली पीढ़ियां भी संस्कारित और सक्षम बनेंगी। महिला सशक्तिकरण को समाज की प्रगति की आधारशिला बताते हुए उन्होंने इसे समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया।
भक्ति रस में डूबा पांडाल, भजनों पर झूमे श्रद्धालु
कथा के दौरान जब मंच से ‘दमादम भोले शंकर’ और ‘भोले आपकी कृपा से सब काम हो रहा है’ जैसे भजन गूंजे तो हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। विशेषकर महिला श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। पूरा पांडाल भक्ति की रसधारा में डूबा नजर आया।
“भगवान की इच्छा से ही होती है कथा”:-
पंडित मिश्रा ने कहा कि कोई भी धार्मिक आयोजन भगवान की इच्छा के बिना संभव नहीं होता। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष कथा की तैयारियां होने के बावजूद आयोजन नहीं हो सका, लेकिन इस बार भगवान की कृपा से यह संभव हो पाया है। उन्होंने संकटमोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबूगिरी महाराज के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें इस आयोजन का मुख्य आधार बताया।
आभूषण नहीं, रुद्राक्ष धारण करें:-
कथा के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि कथा में कीमती आभूषण पहनकर न आएं। “सोने-चांदी पर चोर की नजर होती है, लेकिन रुद्राक्ष पर भगवान शिव की कृपा रहती है,” उन्होंने कहा और सभी से रुद्राक्ष धारण करने का आग्रह किया।
श्रद्धालुओं के अनुभव भी हुए साझा:-
कथा के दौरान कुछ श्रद्धालुओं के पत्र पढ़कर सुनाए गए, जिनमें उन्होंने शिव भक्ति से जीवन में आए सकारात्मक बदलावों का उल्लेख किया। ऐसे श्रद्धालुओं को मंच पर बुलाकर पंडित मिश्रा ने अपने हाथों से बिल्व पत्र भेंट किए, जिससे माहौल और भी भावुक और श्रद्धामय हो गया।
व्यवस्थाएं चाक-चौबंद, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
कथा स्थल पर आयोजन समिति और प्रशासन की ओर से व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। श्रद्धालुओं के लिए छाया, पेयजल, बैठने की सुविधा और विशाल पार्किंग की व्यवस्था की गई है। वहीं पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए यातायात को सुचारु रखने के लिए बैरिकेडिंग और वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू की गई है।
कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित हो रही है। पहले दिन उमड़े जनसैलाब को देखते हुए आने वाले दिनों में और भी अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। भीलवाड़ा में यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बन गया है, बल्कि भक्ति और सामाजिक संदेश का भी एक सशक्त मंच बनकर उभरा है।

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