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झूठ-अहं-अहंकार जले तो हर दिन होली है

By Shubh Bhaskar · 23 Mar 2026 · 23 views
झूठ-अहं-अहंकार जले तो हर दिन होली है

शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।

शाहपुरा-अखिल भारतीय साहित्य परिषद की मासिक साहित्यिक गोष्ठी केशव प्रन्यास भवन में हिन्दू नववर्ष और होली विषय पर आयोजित हुई।जिसकी शुरुआत ड़ॉ कमलेश पाराशर की सरस्वती वंदना 'हे माँ ज्ञान का उपहार दे गिर रहा स्तर यहाँ पर चरित्र का निर्माण कर' से हुई। पाराशर ने 'विश्व गुरु बने भारत ऐसी हो सबकी भावनाएँ, झूठ-अहं-अहंकार जले तो हर दिन होली है' कविता सुनाकर भारत के विश्व गुरु बनने की कामना शब्दों में व्यक्त की। सोमेश्वर व्यास ने 'प्यार से बढ़कर कोई रंग नहीं इसमें भीगकर झोली भर लो, महंगाई का रंग गहरा है इस पर किसी का नहीं पहरा है।' कविता सुनाकर बढ़ती महंगाई पर तंज कसा। व्यास ने 'जगत में कोई नहीं परमानेंट।' कविता सुनाकर जीव-जगत की नश्वरता को रेखांकित किया। तेजपाल उपाध्याय ने 'रागों और रंगों में तुमने बुराई क्यों घोली नीले-पीले रंग छोड़कर कींचड़ से होली क्यों खेली।' कविता के माध्यम से वर्तमान में प्रचलित फूहड़ता पर व्यंग प्रहार किया। उपाध्याय ने 'गणगौर तो लकड़ी की ही आछी' राजस्थानी रचना सुनाकर गोष्ठी को हास्यमय कर दिया। ओम माली 'अंगारा' ने 'हरी-पीली-लाल गुलाल मैं किसे लगाऊँ मल-मलके पिया तुम तो बसे परदेश इन नैनन ते नयन-नीर बरसे।' रचना के माध्यम से विरहिणी नायिका की पीड़ा को शब्दों में अभिव्यक्त किया। अंगारा ने 'श्रम-अनल में तपकर पाऊँ फतह सहज सफलता की अभिलाषा नहीं।' कविता से सन्देश दिया कि विजयपथ का सफर सुगम नहीं होता। डॉ परमेश्वर कुमावत 'परम' ने 'फागण फाग उडातो आवे रे सांवरिया रे मंदिर में मीरा फाग मनावे रे' कविता से गोष्ठी को संगीतमय कर दिया। एडवोकेट दीपक पारीक ने 'होली पर हो गई नेताओं की नीयत पानी-पानी' कविता से शाहपुरा में सियासी भूचाल पर व्यंग्य प्रहार किया। पारीक ने 'रग-रग में जो दौड़ रहा वह समझदारी है वक्त भले पलट जाए रक्त में वफादारी है।' कविता सुनाकर मातृभूमि के प्रति वफादार रहने का संदेश दिया। गोपाल लाल पंचोली ने अपनी कविता 'होली आई होली आई छलना बन ठगने आई' व्हाट्सएप की जिसका वाचन तेजपाल उपाध्याय ने किया। ड़ॉ योगेंद्र शर्मा ने गोष्ठी हेतु कविता का वीडियो बनाकर मथुरा से पोस्ट किया। जिसे गोष्ठी में प्ले किया गया।
अंत में गोष्ठी में प्रस्तुत रचनाओं की विवेचना संस्था के अध्यक्ष तेजपाल उपाध्याय ने की।

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