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संस्कारों की बलिहारी: जिस लाडली को पढ़ाया-लिखाया, उसने तोड़ी कुल की मर्यादा;

By Shubh Bhaskar · 22 Mar 2026 · 81 views
संस्कारों की बलिहारी: जिस लाडली को पढ़ाया-लिखाया, उसने तोड़ी कुल की मर्यादा;

आहत पिता ने 'जीते जी' किया बेटी का त्याग, छपवाया शोक संदेश

शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।

शक्करगढ़-एक पिता के लिए उसकी बेटी ही संसार होती है, लेकिन जब वही लाडली परिवार के मान-सम्मान और कुल की मर्यादा को सरेआम नीलाम कर दे, तो एक पिता की आत्मा किस कदर लहूलुहान होती है, इसका उदाहरण आमल्दा गांव में देखने को मिला। बेटी के समाज विरोधी फैसले से टूट चुके पिता देवेंद्र सिंह कानावत ने अपनी जीवित पुत्री आकांक्षा को 'मृत' मानकर उसका शोक संदेश छपवा दिया है। क्षेत्र में यह चर्चा का विषय है कि एक स्वाभिमानी पिता ने लोक-लाज की खातिर अपनी ही संतान से सदा के लिए मोह भंग कर लिया।
पिता की मनुहार भी नहीं पसीजी: "मेरे लिए मर चुकी है वह"
जानकारी के अनुसार, देवेंद्र सिंह कानावत ने अपनी पुत्री आकांक्षा (27) को बड़े अरमानों के साथ उच्च शिक्षा के लिए जयपुर भेजा था। पिता का सपना था कि बेटी पढ़-लिखकर कुल का नाम रोशन करेगी, लेकिन आकांक्षा ने परिवार की इच्छा के विरुद्ध अन्य समाज के युवक के साथ नाता जोड़ लिया। पुलिस द्वारा दस्तियाब किए जाने के बाद थाने में पिता ने अपनी लाडली के सामने झोली फैलाकर उसे घर लौटने और परिवार की इज्जत बचाने की काफी मिन्नतें कीं, लेकिन आकांक्षा ने पिता के आंसुओं की कद्र न करते हुए युवक के साथ जाने का फैसला किया। इसी गहरी चोट ने पिता को यह कठोर निर्णय लेने पर मजबूर कर दिया।
शोक संदेश में झलकी पिता की पीड़ा: 31 को मृत्युभोज
बेटी के अड़ियल रुख से आहत पिता ने अब उसे हमेशा के लिए त्याग दिया है। छपवाए गए शोक पत्र में आकांक्षा की फोटो के साथ 20 मार्च 2026 को उसका 'स्वर्गवास' दर्शाया गया है। इसमें 22 मार्च को तीये की बैठक और 31 मार्च को ब्रह्मभोज का कार्यक्रम घोषित किया गया है। कार्ड के नीचे शोक संतप्त में पिता देवेंद्र सिंह ब्लॉक कांग्रेस जहाजपुर सहित पूरे परिवार का नाम भी लिखा गया है। पिता का यह कदम उन संतानों के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है जो माता-पिता के त्याग और सामाजिक मर्यादा को दरकिनार कर अपनी राह चुन लेते हैं।
"युवती बालिग है। थाने में उसे परिजनों से मिलवाया गया और काफी समझाने का प्रयास भी हुआ, लेकिन वह युवक के साथ रहने पर अड़ी रही। कानूनन बालिग को उसकी मर्जी के साथ जाने की अनुमति है। दोनों ने पुलिस से सुरक्षा मांगी है। परिजनों द्वारा शोक संदेश छपवाना उनका निजी और भावनात्मक निर्णय है,
पूरणमल मीणा,थाना अधिकारी, शक्करगढ़।

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