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चित्तौड़गढ़ साहित्य उत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ

By Shubh Bhaskar · 25 Feb 2026 · 327 views
चित्तौड़गढ़ साहित्य उत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ

दैनिक शुभ भास्कर राजस्थान चित्तौड़गढ़ कैलाश चंद्र सेरसिया

चित्तौड़गढ़ साहित्य उत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ बुधवार को धर्म और बलिदान की ऐतिहासिक नगरी चित्तौड़गढ़ की पावन धरा पर आयोजित हुआ इस राष्ट्रीय साहित्यिक महोत्सव के प्रथम दिवस पर देशभर से आए साहित्यकारों, विद्वानों और कलाकारों ने सहभागिता निभाई। उद्घाटन सत्र में पद्मश्री डॉ. सीपी देवल, पद्मश्री जानकी राम भांड, सांसद सीपी जोशी, जिला कलेक्टर आलोक रंजन, वरिष्ठ साहित्यकार विनोद जोशी तथा 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के संस्थापक एवं प्रवर्तक अनिल सक्सेना ‘ललकार’ मंचासीन रहे। पद्मश्री डॉ. सी.पी. देवल ने औपचारिक रूप से चित्तौड़गढ़ साहित्य उत्सव-2026 की घोषणा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान-परंपरा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं। उत्सव की समन्वयक शांति सक्सेना ने आयोजन की पृष्ठभूमि, उद्देश्य और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। जयपुर से आई तान्या जैन ने कथक नृत्य के साथ सरस्वती वंदना की। वैदिक विश्वविद्यालय के 51 बटुकों ने चारों वेदों का मंत्रोचार किया। अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए इसे सांस्कृतिक जागरण का अभियान बताया। यूथ मूवमेंट के संस्थापक एवं आयोजन संयोजक शाश्वत सक्सेना ने व्यवस्थाओं का संचालन संभाला और आयोजन को सुव्यवस्थित रूप दिया। दिनभर चले विविध विषयों पर सत्र प्रथम दिवस पर हिंदी साहित्य, लोकभाषा, राजस्थानी अस्मिता, संस्कृत ज्ञान-परंपरा, पर्यावरणीय नैतिकता तथा काव्य परंपराओं जैसे विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। हिंदी जनभाषा, जनपद और लोकतांत्रिक चेतना सत्र में संगम विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. करुणेश सक्सेना, डॉ. अर्जुन चव्हाण (कोल्हापुर, महाराष्ट्र), डॉ. गोविंद गुप्ता (लखीमपुर, उत्तर प्रदेश) तथा डॉ. राखी सिंह (वडोदरा) ने अपने विचार व्यक्त किए। प्रकृति से संवाद लोक साहित्य में पर्यावरणीय नैतिकता सत्र में प्रधानमंत्री कार्यालय के पूर्व निदेशक किशन रतनानी, डॉ. वीणा जोशी (राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता, जयपुर), डॉ. दिनेश पांचाल (डूंगरपुर) तथा श्री घनश्याम सिंह भाटी (बांसवाड़ा) ने साहित्य और पर्यावरण के अंतर्संबंधों पर विचार रखे। संचालन दरभंगा विश्वविद्यालय की व्याख्याता डॉ. विदुषी आमेटा ने किया। लोक में साहित्य राजस्थानी भाषा, अस्मिता और सांस्कृतिक चेतना सत्र में पद्मश्री डॉ. सी.पी. देवल (अजमेर), डॉ. भरत ओला (हनुमानगढ़), डॉ. राजेंद्र सिंघवी (निम्बाहेड़ा) तथा डॉ. प्रवीण कुमार जोशी (भीलवाड़ा) ने राजस्थानी भाषा की समृद्ध परंपरा और पहचान पर चर्चा की। संचालन डॉ. अवधेश जौहरी (भीलवाड़ा) ने किया। वक्ताओं ने साहित्य को सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक संरक्षण और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ते हुए अपने विचार रखे। प्रदेश के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों से आए साहित्यकारों की सहभागिता उल्लेखनीय रही। युवा विद्यार्थियों और शोधार्थियों की सक्रिय उपस्थिति ने आयोजन को विशेष ऊर्जा प्रदान की। अतिथियों , युवाओं और विद्यार्थियों ने पुस्तक मेला और आर्ट गैलरी का अवलोकन किया। इस प्रकार चित्तौड़गढ़ साहित्य उत्सव-2026 का प्रथम दिवस साहित्यिक गरिमा, सांस्कृतिक प्रतिबद्धता और युवा सहभागिता के साथ संपन्न हुआ। आगामी दिनों में भी विविध विषयों पर केंद्रित सत्रों का आयोजन किया जाएगा।

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