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वाराणसी से शंकराचार्य का बयान: “20 दिन में योगी के ‘कालनेमि’ होने के संकेत”- *जगत्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती*

By Shubh Bhaskar · 19 Feb 2026 · 96 views
वाराणसी से शंकराचार्य का बयान: “20 दिन में योगी के ‘कालनेमि’ होने के संकेत”- *जगत्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती*

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- वाराणसी- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘असली हिंदू’ होने के प्रमाण स्वरूप दिए गए 40 दिनों के अल्टीमेटम के 20 दिन पूरे होने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस अवधि में मुख्यमंत्री की ओर से “हिंदू होने के संकेत” नहीं, बल्कि “कालनेमि जैसे आचरण के संकेत” मिले हैं।
शंकराचार्य ने गोरक्षा के मुद्दे पर मुख्यमंत्री की “रहस्यमयी चुप्पी” और अन्य विषयों पर मुखरता को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 21वें दिन से यह संघर्ष “नए और निर्णायक मोड़” में प्रवेश कर चुका है।
संत समाज से आह्वान
शंकराचार्य ने अखाड़ों, महामंडलेश्वरों और महंतों से अपील की कि वे इस विषय पर शास्त्रसम्मत मत स्पष्ट करें। उनका कहना था कि किसी विरक्त संत का धर्मनिरपेक्ष पद पर पूर्णकालिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में कार्य करना सन्यास की मर्यादा के विपरीत है। साथ ही, गेरुआ वस्त्र धारण करने वाले संन्यासी के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मांस व्यापार से जुड़े रहना अनुचित बताया।
‘गोदान’ टैक्स फ्री, पर मुख्य मांगों पर मौन
शंकराचार्य ने कहा कि सरकार ने फिल्म गोदान को टैक्स फ्री करने का निर्णय तो लिया, लेकिन उनकी मुख्य मांगें—गाय को “राज्य माता” घोषित करना और गोमांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध—अब तक पूरी नहीं की गईं। उन्होंने कहा कि “सिनेमा से नहीं, संकल्प से गोरक्षा होगी।”
*पशुगणना के आंकड़ों का हवाला*
उन्होंने भारत सरकार की 20वीं पशुगणना का हवाला देते हुए दावा किया कि पश्चिम बंगाल में गोवंश की संख्या में 15.18% वृद्धि हुई है, जबकि उत्तर प्रदेश में ०3.93% की कमी दर्ज की गई। उन्होंने ‘गंगातीरी’, ‘केनकथा’, ‘खैरगढ़’ और ‘मेवाती’ जैसी देशी नस्लों के संरक्षण पर भी चिंता व्यक्त की।
*मांस निर्यात पर भी सवाल*
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” की आड़ में उत्तर प्रदेश देश का बड़ा मांस निर्यातक राज्य बन गया है और राष्ट्रीय स्तर पर इसकी हिस्सेदारी 43% से अधिक है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति गोरक्षा के दावों से मेल नहीं खाती।
*11 मार्च को ‘लखनऊ चलो’ का आह्वान*
शंकराचार्य ने घोषणा की कि 11 मार्च 2026 को देशभर के गोभक्तों से लखनऊ पहुंचने का आह्वान किया गया है। उन्होंने कहा कि ०1मार्च को लखनऊ प्रस्थान की विस्तृत योजना सार्वजनिक की जाएगी।
उन्होंने दोहराया कि “गोमाता को अधिकार दिलाने तक यह आंदोलन थमेगा नहीं।”

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